बा-आमा दिदि भाई काेहि चाहिदैँन रे
बा-आमा दिदि भाई काेहि चाहिदैँन रे
घरपरिवार समाज उसलाई काेहि चाहिदैँन रे ।
बर्षाै बर्षकाे सम्बन्ध पनि चटक्कै बिर्सिएर
हिजो भेटेकाे मान्छे पाई काेहि चाहिदैँन रे ।।
घरपरिवार समाज उसलाई काेहि चाहिदैँन रे ।
बर्षाै बर्षकाे सम्बन्ध पनि चटक्कै बिर्सिएर
हिजो भेटेकाे मान्छे पाई काेहि चाहिदैँन रे ।।